लॉकडाउन में भी मिला 40 हजार बुनकरों को मिला रोजगार- मंत्री गुरूरुद्र

  • लाॅकडाउन में भी ग्रामोद्योग विभाग उपलब्ध करा रहा रोजगार
  • 40 हजार बुनकरों को मिला नियमित रोजगार- मंत्री गुरु रूद्रकुमार

रायपुर,  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्रकुमार के नेतृत्व में ग्रामोद्योग विभाग हाथकरघा, खादी, रेशम, हस्तशिल्प एवं माटीकला के क्षेत्र में लगातार रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।

मंत्री गुरु रूद्रकुमार ने बताया कि करोना संक्रमण और लॉकडाउन  के दौरान साथ ही अपेक्स संघ द्वारा हाथकरघा बुनकरों द्वारा निर्मित सुती कपड़ों से महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा 2.60 लाख नग मास्क तैयार कर रोजगार उपलब्ध कराया गया है और हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा 26 हजार शिल्पियों को घरों पर ही प्रशिक्षण एवं टूल किट उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाथकरघा संघ के द्वारा 12 हजार 600 करघों के माध्यम से 40 हजार बुनकर कारीगरों को वर्ष भर रोजगार प्रदाय किया गया है।

विभागीय अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार रेशम प्रभाग द्वारा 2020-21 में कुल 695 हेक्टेयर क्षेत्र में 28.49 लाख टसर खाद्य पौधा रोपण कर 2.89 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजन किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 2500 महिला हितग्रहियों को 3.05 करोड़ रूपये के लागत के 2500 धागाकरण मशीने वितरण का लक्ष्य रखा गया है। राज्य के 67 रेशम केन्द्रों में कीटपालन के साथ-साथ 91 स्व-सहायता समूहों की 1461 महिलाओं को अतिरिक्त आय का साधन उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि खादी ग्रामोद्योग विभाग द्वारा कोरोना संक्रमण के दौरान खादी वस्त्र से 90 हजार मास्क तैयार कर विक्रय किया गया है और 11 महिला स्व-सहायता समूह के द्वारा पांच लाख नग हर्बल साबुन निर्मित कर विक्रय किए जाने की योजना है।

इसी कड़ी में स्व-सहायता समूहों को रोजगार उपलब्ध कराते हुए पापड़, बड़ी, अचार, पेन्सिल, मसाला, फिनाईल, मोरेंगा पावडर एवं अगरबत्ती तैयार कर खादी भंडारों के माध्यम से विक्रय किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आगामी तीन माह में 10 लाख लागत की सामग्री तैयार कर चार हजार लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही खादी बोर्ड द्वारा पंजीकृत समूहों को ‘‘खादी इंडिया’’ का मार्का मिला है, जिसके आधार पर इन समूहों का उत्पाद राष्ट्रीय स्तर पर बाजार उपलब्ध हो सकेगा।
विभाग से मिली जानकारी अनुसार माटीकला के 22 हजार शिल्पियों द्वारा घरों में मटका, कलसी, कप, प्लेट इत्यादि बनाकर व्यक्तिगत तौर पर विक्रय किया जा रहा है। लाॅकडाउन की समाप्ति उपरान्त उन्हें चाक वितरण कर लस्सी का गिलास, मिठाई की कटोरियां इत्यादि तैयार कर होटलों को विक्रय किए जाने की योजना है। साथ ही उनके उत्पादों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा।

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