ऐसा होगा आने वाला नव संवत्सर-अभिषेक कृष्ण शास्त्री

भोपाल: (Fourth Eye News) 25 मार्च 2020 को नव विक्रम संवत का आरंभ होगा. नव विक्रम संवत्सर 2077 प्रमादी नाम से पुकारा और जाना जाएगा. इस वर्ष संवत के राजा बुध होंगे और मंत्री चंद्रमा होंगे. प्रमादी नामक संवत के प्रभाव से कृषी के क्षेत्र में विकास देखने को मिल सकता है. अनाज का अच्छा उत्पादन होगा. रस से भरपूर पदार्थों के मूल्यों में बढ़ोत्तरी देखने को मिल सकती है. गुड़ और चीनी जैसे मीठे पदार्थ भी महंगे होने लगेंगे.

उक्त बात भारत राष्ट्र गौरव सम्मान से सम्मानित ज्योतिषाचार्य भागवताचार्य पं श्री अभिषेक कृष्ण शास्त्री जी ने कही..उन्होंने चर्चा करते हुए कहा कि
आषाढ़ माह का समय कम वर्षा हो सकती है और भाद्रपद के महीने में अधिक बारिश होने की संभावना रहेगी. इस नव संवत में राजा और मंत्री के मध्य मित्रता की कमी के कारण सरकार की ओर से कुछ कठोर कानून भी लाए जा सकते हैं. विरोधाभास की स्थिति बनी रहने वाली है. नियम एवं कानून में कठोरता और सख्ती के कारण क्रोध बढ़ सकता है.

सामान्य जरुरतों का सामान महंगा हो सकता है. कुछ कारणों से , राजनीतिक उथल पुथल भी देखने को मिल सकती है. जातिगत हिंसा भी बढ़ सकती है. नव सम्वत्सर का स्थान इस वर्ष वैश्य के घर पर होने के कारण, व्यापारिक और आर्थिक क्षेत्र में तेजी देखने को मिलेगी. मौसम में बदलाव दिखाई देगा.

दूध जैसे पेय पदार्थ महंगे हो सकते हैं. इस समय लोभ व स्वार्थ की स्थिति अधिक दिखाई देगी. व्यापारियों के लिए थोड़ा अधिक लाभ और बेहतर जीवन शैली दिखाई देगी.श्री शास्त्री ने संवत्सर के फलादेश के अनुसार कहा कि देश के दक्षिण प्रांत में अव्यवस्था दिखाई दे सकती है.

शासन परिवर्तन और राजनैतिक उतार-चढा़व दिखाई देते हैं. कहीं-कहीं अनाज की कमी भी देखने को मिल सकती है. इस समय लड़ाई झगड़े और एक दूसरे के प्रति असंतोष भी लोगों में बहुत अधिक होगा.

सम्वत राजा बुध

इस सम्वत वर्ष के राजा बुध होंगे. बुध के प्रभाव से शुभ एवं मांगलिक कार्यों का आयोजन बना रहेगा पर इसके साथ ही इसमें दूसरों के कारण परेशानी भी उत्पन्न की जा सकती हैं. मानसिक रुप से उत्सुकता और उत्साह की स्थिति अधिक दिखाई देती है. बड़े बुजुर्गों के साथ विरोधाभास भी अधिक रह सकता है. मनोरंजन के क्षेत्र में लोगों का झुकाव अधिक रहने वाला है. धन धान्य और सुख सुविधाओं के प्रति भी अधिक इच्छाएं होंगी.

बुध का प्रभाव लोगों के मध्य चालाकी से काम करने की प्रवृत्ति को बढ़ाने वाला होगा. एक दूसरे के साथ झूठ और छल करने की प्रवृत्ति भी बढ़ेगी. कला और संगीत के क्षेत्र में अधिक विकास होगा. व्यापारी वर्ग के लिए थोड़ा बेहतर समय होगा. साधु संतों का भी इस समय प्रभाव अधिक रहने वाला होगा. कानून विरोधी काम भी अधिक होंगे.

सम्वत मंत्री चंद्रमा

चंद्रमा के मंत्री होने के कारण भौतिक सुख सुविधाओं का बोलबाला होगा. लोगों का ध्यान भी इस ओर अधिक रह सकता है. वर्षा अच्छी होने की उम्मिद भी की जा सकती है. दूध और सफेद वस्तुओं का उत्पादन भी अच्छा होगा. रस और अनाज में वृद्धि होगी. बाजार में मूल्यों में उतार-चढा़व जल्दी दिखाई देगा. कोई भी स्थिति लम्बे समय तक नहीं रह पाए. असंतोष और दुविधा आम व्यक्ति के मन में बहुत अधिक रहने वाली है.

सस्येश (फसलों) का स्वामी गुरु

इस समय सस्येश गुरु का प्रभाव होने से रस और दूध और फलों की वृद्धि अच्छी होगी. इस समय वेद और धर्म के मार्ग पर जीवन जीने से लोगों का कल्याण होता है. कृषि के क्षेत्र में अच्छा रुख दिखाई दे सकता है. पशुओं से लाभ मिलने की उम्मीद भी दिखाई देती है. खेती से जुड़े व्यापारियों को भी लाभ मिलने की अच्छी उम्मिद दिखाई देती है.

धान्येश मंगल का प्रभाव

धान्येश अर्थात अनाज और धान्य जो हैं उनके स्वामी मंगल होंगे. मंगल के प्रभाव से चना, सरसों बाजरा के मूल्य में वृद्धि देखने को मिल सकती है. तेल जैसे पदार्थों में तेजी आएगी ये वस्तुएं महंगी हो सकती है.

मेघश सूर्य का प्रभाव

मेघेश यानी के वर्षा का स्वामी. इस वर्ष सूर्य मेघेश होंगे. सूर्य के प्रभाव गेहूं, जौ, चने,
बाजरा की पैदावार अच्छी होगी. दूध, गुड़ भी अच्छे होंगे, उत्पादन में वृद्धि होगी. सूर्य का प्रभाव कई स्थानों पर वर्षा में कमी ला सकता है. नदीऔर तालाब जल्द सूख भी सकते हैं.

रसेश शनि का प्रभाव

रसेश अर्थात रसों का स्वामी, रस का स्वामी शनि होने के कारण भूमी का जलस्तर कम हो सकता है. वर्षा होने पर भी जल का संचय भूमि पर नहीं हो पाए. बेमौसमी और प्रतिकूल वर्षा के कारण अनेक रोग उत्पन्न हो सकते हैं. कुछ ऎसे रोग भी बढ़ सकते हैं जो लम्बे चलें और आसानी से ठीक न हो पाएं.

नीरसेश गुरु का प्रभाव

नीरसेश अर्थात ठोस धातुओं का स्वामी. इनका स्वामी गुरु है. गुरु के प्रभाव से तांबा, सोना या अन्य पीले रंग की वस्तुओं के प्रति लोगों का झुकाव और अधिक बढ़ सकता है. इनकी मांग बढ़ सकती है.

फलेश सूर्य का प्रभाव

फलेश अर्थात फलों का स्वामी. सूर्य के फलों का स्वामी होने के कारण इस समय वृक्षों पर फल बहुत अच्छी मात्रा में रहेंगे. फल और फूलों की अच्छी पैदावार भी होगी ओर उत्पादन भी बढ़ेगा. पर कुछ स्थान पर इसमें विरोधाभास भी दिखाई देगा जैसे की कही अच्छा होना और कहीं अचानक से कम हो जाना.

धनेश बुध का प्रभाव

धनेश अर्थात धन का स्वामी राज्य के कोश का स्वामी. बुध के धनेश होने के कारण वस्तुओं का संग्रह अच्छे से हो सकता है. व्यापार से भी लाभ मिलेगा और सरकारी खजाने में धन आएगा. धार्मिक कार्य कलापों से भी धन की अच्छी प्राप्ति होगी.

दुर्गेश सूर्य का प्रभाव

दुर्गेश अर्थात सेना का स्वामी. सूर्य के दुर्गेश होने से सैन्य कार्य अच्छे से हो सकेंगे. न्याय पालन करने में लोगों का असहयोग रहेगा. पर कई मामलों में कुछ लोग निड़र होकर कई प्रकार के खतरनाक हथियारों का निर्माण करने में भी लगे रह सकते हैं. सरकारी तंत्र से जुड़े लोग नियमों को अधिक न मानें और अपनी मन मर्जी ज्यादा कर सकते हैं.

 

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