महाराजा के बिना आईसीयू में गई कमलनाथ सरकार !

भोपाल: (Fourth Eye News) मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की कांग्रेस से विदाई हो गई, अब ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस पार्टी 70 पार के नेताओं के भरोसे भविष्य की राजनीति करना चाहती है, क्योंकि युवाओं को दरकिनार करने का खामियाजा उसे उठाना पड़ सकता है. माना जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने की वजह भाजपा नहीं बल्कि भविष्य को लेकर कांग्रेस पार्टी की गलत नीति है.

जिसमें बूढ़े नेता, युवाओं को आगे ही नहीं देना चाहते, ऐसा इसलिये भी कहा जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की विदाई की सबसे बड़ी वजह, सीएम कमलनाथ का अड़ियल रवैया और दिग्विजय सिंह की चालबाजी मानी जा रही है, क्योंकि अगर सत्ता में आने के लिए महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी अपनी विचार धारा से समझौता करते हुए, शिवसेना की सरकार में शामिल हो सकती है तो मध्यप्रदेश में अपने ही युवा नेता को मनाने में कांग्रेस कैसे असफल हो गई.

वैसे अगर इसकी वजह खोजी जाए तो पर्दे के पीछे मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह का हाथ माना जा रहा है, ये वही दिग्विजय सिंह है जिनके लिए अजीत जोगी ने कहा था कि दिग्विजय सिंह एक बार मुंह खोलते हैं और कांग्रेस को 10 लाख वोट कट जाते हैं. दिग्विजय सिंह ही वो शख्स हैं जिन्होने पर्दे के पीछे से छत्तीसगढ़ के बड़े नेता और पूर्व सीएम अजीत जोगी को परिवार सहित पार्टी से बाहर निकालने की बिसात बिछाई थी. जिसकी वजह से आखिरकार छत्तीसगढ़ कांग्रेस अजीत जोगी मुक्त हो गई.

छत्तीसगढ़ में हालांकि भाजपा से आम लोगों की नाराजगी इतनी ज्यादा थी कि कांग्रेस की सेहत पर अजीत जोगी के पार्टी से बाहर जाने का ज्यादा असर नहीं पड़ा, लेकिन मध्य्प्रदेश में दिग्विजय सिंह की यह चाल उलटी पड़ने जा रही है. माना जा रहा है कि इससे कांग्रेस को एमपी में भारी नुकसान उठाना पड़ सकत हैं.

पहले तो 15 साल बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री पद नहीं दिया गया, इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद के लिए प्रदेश अध्यक्ष की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन इसमें दिग्विजय सिंह लगातार अड़ंगे लगाते रहे, फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोचा था कि उन्हें राज्यसभा भेजा जाएगा. लेकिन यहां भी कमलनाथ और दिग्विजिय सिंह ने उनकी राह में कांटे बिछा दिये, इसमें आलाकमान सोनिया गांधी का भी इन्हें साथ मिल गया.

जिसके बाद से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी अलग राह पकड़ने की ठान ली. फिलहाल अगर नफा नुकसान की बात देखी जाए तो इसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया फायदे में दिख रहे हैं, भाजपा को तो इससे घनघोर फायदा हो रहा है, लेकिन कांग्रेस को ज्योतिरादित्य सिंधिया के पार्टी छोड़ने के बाद सिर्फ और सिर्फ नुकसान के सिवाय कुछ दिखाई नहीं दे रहा. और 15 साल से सत्ता का वनवास झेल रही कांग्रेस एक बार फिर आईसीयू में जाती दिख रही है.

 

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